उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक मंच की स्थापना करना

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भ्रष्टाचारी किसी अपराधी या आतंकवादी से ज्यादा किसी समाज का नुकसान करता है। अपराधी या आतंकवादी कुछ व्यक्तियों को मार सकते हैं लेकिन एक भ्रष्टाचारी एक पूरी की पूरी पीढ़ी का भविष्य बर्बाद करता है।

 

 

हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में भ्रष्टाचार की छोटी मोटी घटनाएं होती रहती है, और शायद यह कुछ हद तक हमारे जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। ऐसे मामलों में जब भी हम किसी अधिकारी की शिकायत उससे बड़े अधिकारी से करते हैं तो पर सुनवाई होती है और भ्रष्ट अधिकारी को अक्सर सबक सिखाया जाता है।

मगर उत्तराखंड में ऐसा नहीं है | उत्तराखंड में भ्रष्टाचार का स्वरूप देश के दूसरे राज्यों से अलग है यहां पर राजनितिक भ्रष्टाचार से ज्यादा प्रशासनिक भ्रष्टाचार हर स्तर पर गहराई तक अपनी पैठ बना चूका है और चिंता जानक बात यह है कि यहां पर भ्रष्टाचार एक संगठित रूप ले चूका कई जिसमे IAS अधिकारीयों से लेकर ग्रामीण विकास अधिकारी तक शामिल है । उत्तराखंड के कई बड़े विभाग ऐसे गिरहो के रूप में तब्दील हो चुके और उनके सीईओ या डायरेक्टर उस विभाग के सरगना की भूमिका में आ चुके। उत्तराखंड में DM स्तर के अधिकारी भी उतना ही काम कर रहे है जितना facebook पोस्ट के लिए जरुरी होता है | कई विभगों में अधिकारी अपनी समान्तर सरकार चला रहे है वह किसी की नहीं सुनते उन्हें किसी की परवाह नहीं चाहे सामान्य जनता हो जनप्रतिनिधि हो मंत्री हो प्रेस हो या कानून।

पिछले 20 वर्षों में उत्तराखंड के अंदर अगर जबरदस्त भ्रष्टाचार नहीं हुआ होता उत्तराखंड आज अपने पैरों पर खड़ा होता। उत्तराखंड के अंदर कितना भयानक प्रशासनिक भ्रष्टाचार हुआ हुआ इस बात का अनुमान इस बात से लगा सकते हैं कि केवल स्किल डेवलपमेंट के नाम पर हमारे हिस्से हजारों करोड रुपए खर्च होने के बावजूद अगर आज आप उत्तराखंड में कोई छोटा सा कोर्स करना चाहते हैं आप मशरूम पालन की ट्रेनिंग लेना चाहते हैं आप अचार बनाना सीखना चाहते हैं आप आप मुर्गी पालन सीखना चाहते हैं आप मधु मक्खी पालन सीखना चाहते है , आप होम स्टे खोलना चाहते हैं आप कार मैकेनिक बनना चाहते हैं आप टेलरिंग का काम सीखना चाहते हैं आप मोटर वाइंडिंग का काम सीखना चाहते हैं वाटर फिल्टर रिपेयरिंग सीखना चाहते हैं कंप्यूटर ट्रेनिंग करना चाहते हैं आपके पास सीखने का कोई भी उपाय नहीं है।

आज उत्तराखंड में कई घर ऐसे हैं जिनकी छतों से हर बरसात में पानी टपकता है दूसरी तरफ भ्रष्ट अधिकारी हर साल अपने झूमर का डिज़ाइन बदलवा रहे हैं |
आज भी उत्तराखंड में कई घर ऐसे हैं जहां पर यह सोचना पड़ता है कि रात का चूल्हा कैसे जलेगा लेकिन अधिकारी नदी किनारे बार्बी क्यू लगा कर मौज में हैं |
कई गावों में पीने के लिए एक बूंद पानी नहीं लेकिन अधिकारियों के घरों में स्विंगपूल पुल बन रहे |
राज्य में जितने नौकरियाँ मिल रही है वो इन्ही , जितने सरकारी ठेके मिल रहे है वो इन अधिकारीयों के बच्चों को या इनके रिश्तेदारों को मिल रहे है | जितने होटल और रिसॉर्ट खुल रहे हैं अधिकतर इन पदाधिकारियों के हैं

में एक तरफ तो स्किल वर्कर्स की बहुत कमी है दूसरी तरफ विभन्न जिलों में 42 ITI बंद हो गए | इसके विरोध में एक आवाज सुनी आप लोगों ले। वो ITI क्यों बंद हुए स्टूडेंट्स नहीं थे ,फंड्स नहीं थे ,ट्रेड्स नहीं थे ,कोण सा अधिकारी जिम्मेदार था –किसी सवाल का कोई जवाब नहीं |
आप कल्पना कीजिए एक ITI को कहलवाने के लिए उस क्षेत्र के लोगोंने कितना संघर्ष किया होगा ? कितने स्टूडेंट्स वहां पढ़ते होंगे ? कितनों के सपने टूटे होंगे ? केतनो के भविष्य पर परशान चिन्ह लगा होगा ?

हालत में हमारे पास दो रस्ते है पहला आसान हम अपने बच्चों को तैय्यार कर ले साहब लोगों के बर्तन मांजने के लिए ,खाना बनाने के लिए ,कपङे धोने के लिए ,गाड़ियाँ साफ़ करने के लिए, कार चलने के लिए, जूते साफ़ करने के लिए,चौकीदारी करने के लिए,उनके सामने नाचने के लिए , उनके बच्चों के डाइपर बदलने के लिए , पैर दाबने के लिए , मसाज करने के लिए और भी बहुत कुछ ..

दूसरा रास्ता है भ्रष्टाचार के के विरुद्ध लड़ाई भ्रष्टाचार से लड़ना हमारे अस्तित्व की सुरक्षा के लिए और हमारे बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए एकमात्र उपाय है | आज सोशल मीडिया के इस दौर में लड़ाई को लड़ना बहुत आसान है बस हमें , हम में से हर एक को इस लड़ाई के लिए जागरूक होना होगा |

अक्सर हम सोशल मीडिया पर हम वीडिओज़ देखते है कि एक सड़क बनी और टूट गई | हमें विडिओ अब थोड़ा बड़ा बनाना है उसमे टूटी हुई सड़क के साथ -साथ यह भी देखना है कि वो सड़क किस ठेकेदार ने बनाई ? वहां इंजीनियर कोण है ?, किसने सड़क पास की ?और उच्च अधिकारी कौन-कौन हैं ? ,उस एरिया में एसडीएम कौन है ? डीएम कौन ?

भ्रष्टाचार के प्रति लड़ाई हमारे अस्तित्व की सुरक्षा के लिए और हमारे बच्चों के भविष्य भविष्य के लिए एकमात्र उपाय आज सोशल मीडिया के इस दौर में लड़ाई को लड़ना बहुत आसान है अब हमें मात्र यह नहीं दिखाना हमारे क्षेत्र में कुल सड़क खराब यह सड़क बनी और टूट गई हमें सोशल मीडिया पर यह पोस्ट करनी है वह किस ठेकेदार ने बनाई वहां पर उच्च अधिकारी कौन-कौन थे उस एरिया में एसडीएम कौन है डीएम कौन है क्योंकि खराब सड़क के लिए उत्तरदाई सिर्फ ठेकेदार नहीं है सभी लोग नाम और

उत्तराखंड में विकासकार्यों को धरातल पर लाने के लिए आवश्यक है कि भृष्ट अधिकारिओं की चर्बी कम करने के उपाय संगठित रूप में किये जाएं जिन्हे फाइलें दबाने का शोक हैं उनकी फाइलें बनाकर Google ,Facebook,Youtube,Twitter ,Instargram पर एक दस्तावेज के सूरत में प्रकाशित किया जाए | जिन लोगों ने उत्तराखण्ड के नौजवानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है ! जिन लोगों ने उत्तराखंड के सामाजिकता को हानि पहुँचाई हैं हम उन सफेदपोश लोगों के दाग दार चेहरों को बेनकाब करेंगे | हम हर संवैधानिक मंच पर उनके विरूद्ध लडाई लड़ेगे साथ ही उत्तराखंड के नोजवानो को ,मातृशक्ति को सामन्य नागरिकों को इतना जागरूक करेंगे कि वो भृष्ट अधिकारिओं के हल्क में हाथ डाल कर अपना हक़ हासिल करने की हिम्मत कर सके |