उत्तारखंड में रिटेल बिज़नेस शुरू करने के लिए विवरण

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रिटेल मैनेजमेंट: बिक्री की कला का विज्ञान
रिटेल पैटर्न धीरे-धीरे बिजनेस के सभी बड़े सेक्टरों में प्रवेश कर रहा है। आने वाले समय में इस सेक्टर में जॉब की बेहतरीन संभावनाएं हैं। इस सेक्टर में करियर के बारे में बता रही हैं नमिता सिंह

तेजी से खुल रहे शॉपिंग सेंटर, मल्टी स्टोरी मॉल्स के चलते कई क्षेत्र तेजी से गुलजार हुए हैं। इन्हीं में से एक रिटेल सेक्टर भी है। आज रिटेलिंग का व्यवसाय ग्लोबल इकोनॉमी का हिस्सा बन चुका है तथा वर्तमान सदी में बूमिंग इंडस्ट्री का रूप धारण कर चुका है। साथ यह देश की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण रोल अदा कर रहा है। सीधे तौर पर कहा जाए तो रिटेलिंग बिजनेस इंडस्ट्री का एक ऐसा अंग है, जिसके अंतर्गत बेचे जाने वाले प्रोडक्ट एवं उपभोक्ता को उचित कीमत पर दी जाने वाली सेवाएं शामिल हैं। इसके विस्तार का ही असर है कि इसे बाकायदा एक पाठय़क्रम का रूप दिया जा चुका है तथा मैनेजमेंट के प्रतिष्ठित संस्थानों द्वारा कराए जाने वाले कोर्स में शामिल किया गया है। इस पूरे प्रोफेशन को रिटेल मैनेजमेंट तथा इसके प्रोफेशनल्स को रिटेल मैनेजर, स्टोर मैनेजर, विजुअल मर्चेडाइजर आदि कहा जाता है। विशेषज्ञों की मानें तो यह आम आदमी से संबंधित उद्योग है। इसमें किसी भी प्रोडक्ट को बेचने संबंधी कार्य से लेकर कस्टमर डीलिंग, स्टोर का काम तथा कंज्यूमर को अपनी सेवाएं देना शामिल होता है। प्रोसेसिंग मर्केडाइजिंग शिपमेंट, स्टोर एडमिनिस्ट्रेशन व क्लाइंट से बातचीत करने जैसे कार्यों में ट्रेंड एवं क्षमतावान पेशेवरों के लिए रिटेल सेक्टर में भारी मांग है, क्योंकि बाजार में सरपट दौड़ लगी है तथा सरकार की नीतियां भी इस इंडस्ट्री की पक्षधर हैं।

कोर्स एवं प्रवेश संबंधी जानकारी
इस फील्ड में कई तरह के प्रोफेशनल कोर्स जैसे एमबीए, पीजी डिप्लोमा, डिप्लोमा, सर्टिफिकेट आदि मौजूद हैं। इसके एमबीए पाठय़क्रम में दाखिला प्रवेश परीक्षा (कैट, जैट व मैट) के जरिए मिलता है। ज्यादातर संस्थान मेरिट व इंटरव्यू के आधार पर प्रवेश दे देते हैं। भारत की पहली स्वतंत्र बॉडी रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आरएआई) प्रतिवर्ष एक कॉमन एडमिशन रिटेल टेस्ट भी कराती है। यह एक अखिल भारतीय टेस्ट होता है।
इसके पश्चात
पीजी प्रोग्राम में दाखिला मिल जाता है। इस संस्था से देश व विदेश के 15 से भी ज्यादा बी स्कूल जुड़े हुए हैं।

किस रूप में मिलेंगे अवसर
रिटेल सेक्टर में जॉब कई रूप में सामने आती हैं-

सेल्स पर्सन: प्रोफेशनल को एंट्री लेवल में सेल्स की पोस्ट मिलती है। रिटेल कंपनियां इन्हीं सेल्स पर्सन के ऊपर निर्भर करती हैं। एक अच्छा सेल्स पर्सन होने के लिए प्रोडक्ट की अच्छी समझ, शॉप, कस्टमर आदि की जानकारी होनी जरूरी है। सेल्स एसोसिएट, सेल्स मैनेजर, डिपार्टमेंट मैनेजर जैसे कुछ पद हैं, जो इस विभाग के अंतर्गत आते हैं।

स्टोर मैनेजर: अधिकांशत: इन्हें जनरल मैनेजर या स्टोर डायरेक्टर कहा जाता है। आज की कार्यशैली के हिसाब से यह बेहद जिम्मेदारी वाला पद होता है। ये कर्मचारियों को वेतन देने से लेकर उनकी ड्य़ूटी तय करने जैसा कार्य भी करते हैं। उस स्टोर की रिपोर्ट डिस्ट्रिक्ट एरिया मैनेजर को भेजना भी इन्हीं का काम होता है।

रिटेल मैनेजर: एक रिटेल मैनेजर का कार्य आउटलेट के लिए प्लान तैयार करने से लेकर कोऑर्डिनेशन तथा ऑपरेशन आदि है। रिटेल ऑर्डर एवं स्टॉक की मॉनीटरिंग, एम्प्लाई की रिपोर्ट तैयार करने का काम इस सेक्शन के अंतर्गत आता है। एमबीए कर चुके छात्र रिटेल मैनेजर के रूप में करियर स्टार्ट कर सकते हैं।

रिटेल बायर्स एवं मर्चेडाइजर: ये रिटेल के सामान तय करने तथा उन्हें खरीदने का काम करते हैं, इसलिए इन्हें कस्टमर की समझ, ट्रेंड व मार्केट की जानकारी होनी जरूरी है।

विजुअल मर्चेडाइजर: यह इंडस्ट्री का एक बडम पद होता है। इसके अंतर्गत ब्रांड को एक आकार दिया जाता है। स्टोर का डिजाइन व कॉन्सेप्ट तैयार करने, लेआउट, कलर, कंज्यूमर की पसंद आदि कार्यो के चलते यह सेक्शन टेक्निकल डिजाइनर, प्रोडक्ट डेवलपर तथा स्टोर प्लानर का रूप अख्तियार कर चुका है। सप्लाई चेन डिस्ट्रिब्यूटर्स, लॉजिस्टिक एवं वेयरहाउस मैनेजर, मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव के रूप में इस इंडस्ट्री में काम कर सकते हैं।

योग्यता
रिटेल मैनेजमेंट के लिए संचालित एमबीए व पीजीडीआरएम कोर्स में दाखिला ग्रेजुएशन के बाद ही मिल पाता है, जबकि बीबीए में बारहवीं के बाद अवसर मिलता है।

इसके अलावा सर्टिफिकेट एवं डिप्लोमा कोर्स के लिए छात्र को क्रमश: बारहवीं पास व ग्रेजुएट होना आवश्यक है। इस फील्ड के लिए एमबीए सबसे उपयुक्त डिग्री मानी जाती है।

स्किल्स
बेहतर कम्युनिकेशन स्किल्स
अच्छा आचरण व व्यवहार
क्लाइंट को डील करने की दक्षता
प्रोडक्ट की उपयोगी जानकारी
रिटेल इंडस्ट्री के बदलाव से अपडेट
एडवरटाइजिंग एवं मर्चेटाइजिंग तकनीक के साथ एकरूपता
प्रोडक्ट डिस्प्ले और उसकी जरूरत की समझ

एजुकेशन लोन
राष्ट्रीयकृत बैंकों जैसे एसबीआई, पीएनबी, विजया बैंक, ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया से देश अथवा विदेश में कोर्स करने के लिए 10-20 लाख रुपए तक लोन लिया जा सकता है। हर बैंक के अपने नियम व शर्ते हैं। लोन के लिए छात्रों को कई महत्वपूर्ण डाक्युमेंट भी जमा कराने होते हैं।

संभावनाएं
कई ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें रिटेल इंडस्ट्री का समावेश हो चुका है तथा प्रोफेशनल्स को काम मिल रहा है। देश की तथा मल्टीनेशनल कंपनियां कई रूपों में संभावनाएं ला रही हैं, जिसके चलते देश व विदेश दोनों जगह काम करने के अवसर मिल रहे हैं।

आने वाले समय में अधिकांश रिटेल कंपनियां ग्रामीण क्षेत्रों में अपना सेटअप लगाने वाली हैं। इस दिशा में शुरुआत भी हो चुकी है। इसके लिए उन्हें कुशल व योग्य प्रोफेशनल्स की जरूरत होगी।

वेतन
इस इंडस्ट्री में वेतन कंपनी, काम के स्वरूप तथा क्षेत्र पर निर्भर करता है। इसमें आमतौर पर शुरुआती वेतन 8000-10000 रुपए प्रतिमाह होता है, जबकि प्रतिष्ठित संस्थान से एमबीए करने वाले छात्र को 22000-25000 रुपए प्रतिमाह वेतन दिया जाता है। फील्ड में काम करने वाले प्रोफेशनल्स को टारगेट पूरा करने के बाद बोनस व इंसेंटिव भी मिलता है।

एक्सपर्ट्स व्यू

कोर्स के पश्चात ही कदम रखें छात्र
यह एक प्रैक्टिकल इंडस्ट्री है व इसमें छात्र दुकान स्तर पर कार्य आरंभ कर सकते हैं। इससे अलावा रिटेल सेक्टर कई अन्य अवसरों जैसे मर्केंडाइजिंग से लेकर सप्लाई चेन मैनेजमेंट एवं मार्केटिंग आदि में मौका देता है। छात्रों को क्लास के रूप में स्टोर मैनेजमेंट, स्टोर ऑपरेशन से लेकर उसके लेआउट, मर्चेटाइजिंग, मार्केटिंग, कस्टमर रिलेशन आदि पर किताबी व प्रायोगिक ज्ञान दिया जाता है। मेरा सुझाव है कि छात्र कोर्स करने के पश्चात ही इसमें कदम रखें।
-डॉ. तरुन, एचओडी, पर्ल एकेडमी

फायदे व नुकसान
बूमिंग इंडस्ट्री का हिस्सा बनने का अवसर
आत्मविश्वास मजबूत होना
दक्षता दिखाने का अवसर
क्लाइंट डीलिंग में परेशानी
काम का विस्तृत दायरा
चुनौतियों से जूझना ही दिनचर्या

आंकड़ों की जुबानी
एक रिपोर्ट के मुताबिक रिटेल इंडस्ट्री की हिस्सेदारी 2008 में पांच प्रतिशत थी, वहीं 2015 तक बढ़ कर इसके 10-14 प्रतिशत तक होने की उम्मीद है। देश की जीडीपी में कुल 14-15 प्रतिशत का तथा रोजगार सेवा क्षेत्र में आठ प्रतिशत का योगदान देने वाली इस इंडस्ट्री का दायरा आगामी पांच वर्षो में फैल कर 30 प्रतिशत तक हो जाएगा।

बिजनेस मॉनीटर इंटरनेशनल (बीएमआई) द्वारा इंडियन रिटेल इंडस्ट्री पर दी गई एक रिपोर्ट के मुताबिक 2015 तक इस इंडस्ट्री का कुल कारोबार 785.12 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।

ref:-https://www.livehindustan.com/news//article1-story-375004.html