उत्तराखण्ड सँस्कृति के प्रति युवाओं का प्रेम

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16 साल के उतराखण्ड राज्य बनने के पश्चात राज्य की स्तिथि कैसी बनी क्या रही इस चर्चा की जाए तो बहस छिड़ जाएगी पर एक बात तो है कि उत्तराखण्ड का आज का युवा उतराखण्ड सँस्कृति को लेकर उत्साहित हुआ है दिल्ली एव अन्य महानगरों में रह रहे सामाजिक विशेषकर युवा सगठनो द्वारा निरन्तर सांस्कृतिक नृत्य नाटकों कवि गोष्ठियों आदि के आयोजन से देखा जा सकता है।
चूंकि उतराखण्ड सरोकारो से सीधे सीधे विभिन्न संगठनों से जुड़ा होने के कारण मेरा आज भी उत्तराखंड के समग्र विकास को लेकर उत्साह कम नहीं हुआ है बस थोड़ा स्थितियां बदल गईं है। सभी जुझारू साथी पारिवारिक दायित्वों के कारण बढ़ती उम्र के साथ निज स्वास्थ्य के कारण उतना सक्रिय नहीं हो पा रहे हैं।
मेरा आह्वान है कि पलायन बेरोजगारी जैसी मूलभूत समस्याओं को लेकर सभी युवा विशेषकर मातृ शक्ति एकत्रित हों और चकबन्दी के समर्थन के लिए अपने अपने परिवारों में स्वस्थ वातावरण बनाएं ये तभी सम्भव है कि महानगरों में रह रहे उतराखण्ड के लोग अपने अपने गाँव में जाकर सूखे और बंजर हो रहे खेतों की तरफ नजर डालें और गाँव मे रह रहे परिजनों को चकबन्दी के लिए प्रेरित करें। तभी ये मुहिम एक आंदोलन का रूप ले पाएगी। जब इधर उधर बिखरे खेत एक विशाल आकार लेंगे खेती से बेहतर उपज प्राप्त हो पाएगी।बेतासहा बढ़ रही पलायन बेरोजगारी की समस्या कमजोर पड़ने लगेगी ऐसा मेरा विश्वास है।
उतराखण्ड जन मोर्चा उतराखण्ड पृथक राज्य संघर्ष का एक अग्रणी सामाजिक संग़ठन जिसका 1993 में ही इन्ही मुद्दोंको लेकर गठन किया गया था आज भी विपरीत परिस्थितियों में भी कटिबद्ध है अपने संकल्पों को लेकर।

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